राखी पावन बड सुहावन
भाई बहिनके सुन्दर पावन
बिसरिजाउ झगडा सबटा
रक्षा सुत्र बनल हातमे राखी
दीर्घायूके कामना एकेटा

बाल्यकालमे कि देलैथ निहारैत
बडकाभक भैया कहिया एता सोचैत
बहिन सबहक हाल नै पुछु
भाय भैयालेल अटुट प्रेम देखु
अबर्णित , अदभूत माइन सकैछि
पावन सुहावन सबके मनबैइत देखैछि

हात सुन्न भेल जँ बहिन नै रहति
भाय बिन बहिन सेहो असगर कहेति
सहोदर सन क्यो नै धरती पर
बिस्वास आ मिठास केवल अपनेपर

एकबेर जे भैया नै एता
दुरे सँ बहिन पितायल देखता
व्यस्तता सब छोडि ,पावन मनालिय
कतबो मनमुटाब हुवे यो भईया ,राखी बनहालिय
राखी पावन बड सुहावन
भाय बहिनके सुन्दर पावन ।।

जय माता जानकी जी जय मिथिला
रचियता :  ज्योति झा