कतेक करु बखान
अपन मिथिला अछि महान
सदिखन छल ,रहबेकरत
अपने छलौं , अकान बकान

बिदेशिया के बडप्पन बुझलौं
अपनो भाषा सँ छलौं अनजान
लजाइत ,मुह झाँपैत किया रहलौं
जँ मिथिला अछि आँहाके प्राण

घर भितर बिदेशिया बनलौं
बाहरमे भाषण , मिथिला महान
जइर अपन अछि हिलगेल
पराइ के माथ दोष रोपागेल

बाहर कतबो झन्डा लहरायब
अन्तः मन सँ करेजमे सटायब
मिथिला , मैथिल सबदिन छैक महान
अपने छलौं अकान बकान

मुर्ति, मन्दिर, जगह उहे अछि
नजरिया बदैल रहल अछि
माँ त माँ रहबे करत
कतबो नाम परिवर्तन करत

बिसरल बाट घुरि अयलौं
अपन अंगना आब चिन्हलौं
मिथिला ,मैथिल सबदिन छैक महान
अपने छलौं अकान बकान

जय माता जानकी जी,जय मिथिला,जय मैथिली 🙏🙏🙏🙏🙏