हम नई केलौ कखनो बिश्राम
हरदम हरछन हम केलौ काम
चिर धरती के सिना उब्जेलौ अन्न धान
फाटल कपडामे हमर नाम परल किसान।।
किआ कि हम छि एक किसान..

कहिओ मौसमके मार झेल्लौ
त कहिओ वर्षाके आश लगेलौ
आब कोना होइत दुगुना कमाइ
इहे आशमे सरकारसँ गुहार लगेलौ।।
किआ कि हम छि एक किसान..

परिश्रम क के बेटाबेटिके पढेलौ
मेहनत करैके पाठ सिखेलौ
जखन नौकरी लगबैके लेल सोचलौ
तखन किओ नई देलक हमरापर ध्यान।।
किआ कि हम छि एक किसान..

हल जोतनाइ अछी हमर पहिचान
लेकिन बैन गेलौ हम आब राजनैतिक सत्ताके दोकान
पार्टी सभ चाहैत अछी,
हमर नामपर अपन-अपन मुस्कान।।
किआ कि हम छि एक किसान..

किसान सभ कर्ज लौटाबै लेल होइत अछी इमानदार
स्थिति खराब भेल त भजाइ छि परेसान
जखन नई भेटेतय हमरा मेहनतके उचित दाम
तखन धारणामे बैसक भजाइ छि हम बदनाम।।
किआ कि हम छि एक किसान..

मुदा किसानपर अछी देशमे बहुत योजनाके नाम
किसानके नाम पर सरकार करैत अछी बहुत काम
नेतागन सरकारी योजना सभ देत अछी
अपन कार्यकर्ताके नाम।।
किआ कि हम छि एक किसान..

आब सरकार सँ एकेटा अछी अरमान
समयमे मिले सहजतासँ बियाँ,खाद आ सिचाई
हमरा भेटै अपन फसलके निक दाम
ताकी जीवन हमर बितै निकसँ भोर साझ।।
जब किसानके मेहनत आ मागके कदर नै हेतै
तब जेबे करबै दिल्ली,पन्जाब
ओतही धनकटनी करबै
तहुस अगर नै हेतै तब खाडि मुलुक छेबे करै।।
किआ कि हम छि एक किसान..
– सोनम मिश्र