बड भेल आँहा सबके मनमानी
छोइड दिय इ रित खानदानी
उमेर अछि ,हमरा पढ लिख दिय
मष्तिस्क अछि हमरो से बुइझलिय

पइढलिख क बढायब कुलके मान
बुइझो क बनल छि किया अनजान
बेटि भार नै, भार उठबबालि छि हम
भाय आ भईया स नै छि पढमे कम

कन्यादान स पहिले बिद्या दान करू
योग्य बनाक हमरा चारोधामके पुण्य करू
बालविवाह सन पाप आब नै सोचु
बेटिके सुवर्ण अवसर दक देखू

बिन्ती एतबे हमरो पढलिखदिय
आज्ञाकारी संसकारी बनादिय
संघर्षक चुल्हामे अखने नै धिपाउ
बालविवाह स अपन धियाके बचाउ

सोनाचान्दिके नै बाबु शिक्षाके गहना गरहा दिय ,
हरेक पथमे मजबुत रहब तेहन बनादिय
आँहा सब बिन असगर भजायब
पढाक हमर शक्ति बढादिय
बिवाह नै यौ बाबु पहिने हमरा पढादिय ।।
जय माता जानकी जी जय मिथिला
रचयिता : ज्योति झा